#अन्तवाड़ा_की_काली_नदी_ने_बुला_लिया_शूटर_दादियो_को
आज मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र के गुर्जर बाहुल्य अंतवाड़ा गांव में जल क्रांति द्योतक बन रहे #रमन_कांत_त्यागी द्वारा कार्यक्रम आयोजित हुआ।
इस गांव से एक वृक्ष के पास से नागिन नाम की नदी निकलती थी जिसे #काली_नदी भी कहा जाता था।
यह नदी 550 किलोमीटर का फासला तय कर कन्नौज के पास गंगा में मिल जाती थी लेकिन लंबे समय से यह नदी लुप्त थी।
नीर फाउंडेशन से जुड़े रमन कांत त्यागी और उनकी टीम के साथ कुछ अन्य एनजीओ ने कार्य किया और यहां 41 बीघा क्षेत्र में साफ-सफाई, खुदाई शुरू की तो दोबारा से उसी स्थान पर यह नदी फिर से बाहर निकल आई, जहां से पूर्व में इसका उद्गम स्थल था।
ऐसा महसूस हो रहा है जैसे धरती की कैद में छटपटाहट महसूस कर रही थी यह नदी बाहर खुले में विचरण को बहुत बेचैन थी।
यह खबर धीरे-धीरे चारों ओर फैल गई। मीडिया, सियासी, प्रशासनिक तंत्र के साथ आम आदमी यहां पहुचने लगा
आज सांड की आंख नाम की जो ऐतिहासिक फिल्म जिन शूटर दादीओं के नाम पर बनी वे दोनों शूटर दादी चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर भी यहां आई।
मूसलाधार बारिश के बीच भारी कीचड़ होने के बाद भी दोनों दादी अंतवाड़ा के उस स्थल पर पहुंची जहां से खुदाई के बाद काली नदी फिर से पुनर्जीवित हो उठी है।
82 साल की प्रकाशी तोमर और 88 साल की चंद्रो तोमर को शीत लहर, तेज़ बारिश, कीचड़ भी नहीं रोक पाई।
दोनों ने यहां आकर वृक्षारोपण और सांकेतिक श्रमदान कर लोगों को भी प्रोत्साहित किया कि वे भी नदी को पुनर्जीवित करने में योगदान दे।
निश्चित रूप से यह नदी कुछ नदी, नालों, बरसाती पानी के सहारे शीघ्र अपने पूर्व रूप में अवश्य आएगी।
फिलहाल जो जल धरती से बाहर निकला वह बहुत मीठा है और लोग उसे ले भी जा रहे हैं।
कुछ लोग उस पानी से स्नान कर दावा कर रहे हैं कि उनका चर्म रोग ठीक हो गया है।
क्षेत्र के सांसद ने भी 6000 आबादी के इस गांव को आदर्श गांव बनाने हेतु गोद लेने का फैसला किया है। अंत वाड़ा के प्रधान जितेंद्र जी का स्पष्ट कहना था कि वह पूर्ण प्रयास करेंगे कि अंतवाड़ा से निकल रही काली नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास निष्फल ना हो।
यहां कलश की स्थापना की गई है वहीं यज्ञ भी कराया जा रहा है।
कुल मिलाकर कहे तो आज बहुत ठंड थी, तेज हवाएं थी बारिश भी पड़ती रही मगर इस सब के बीच आज अनतवाडा गांव में भाई रमन कांत त्यागी के इस कार्यक्रम में पहुंचकर महसूस हुआ
कोई कुछ ठान ले तो मुश्किल कुछ नही।
काली नदी को पुनर्जीवित करने के रमनकान्त त्यागी के भगीरथी प्रयास में लोग सहायक रहेंगे, ये लोगो ने प्रण लिया।