*हरियाणवी देहाती फिल्म अलझ पलझ का हुआ अवार्ड कार्यक्रम आयोजित।

*हरियाणवी देहाती फिल्म अलझ पलझ का हुआ अवार्ड कार्यक्रम आयोजित।*
*देहाती फ़िल्म सितारों से सजी मुजफ्फरनगर में महफ़िल*
मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में फिल्माई गई देहाती फिल्म अलझ पलझ का अवार्ड फंक्शन मंसूरपुर स्थित देवराना रेस्टोरेंट में भव्यता के साथ किया गया।
 जिसमें उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री विजय कश्यप, बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक, खतौली विधायक विक्रम सैनी, एडीएम प्रशासन अमित कुमार,  एसपी ट्रैफिक बीबी चौरसिया, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार, एसडीएम खतौली अजय अम्बुष्ट, सीओ खतौली आशीष कुमार, सीओ सदर कुलदीप कुमार, थानाध्यक्ष मंसूरपुर मनोज चाहल, खतौली कोतवाल संतोष त्यागी, नमामि गंगे संयोजक डॉ वीरपाल निर्वाल, अमित राठी जिला पंचायत सदस्य, श्रीमती बीना शर्मा, श्रीमती संजू तोमर, श्रीमती सुमन बालियान, विपिन सिंह बालियान, निधीश गर्ग, अरशद गुड्डू, असद जमा, कंवर इंतेखाब, मंसूरपुर सुगर मिल वीपी अरविंद दीक्षित, बलधारी सिंह, ओंकारनाथ तिवारी आदि उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम दीप प्रज्वलन के बाद राष्ट्रगान से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
तत्पश्चात अलझ पलझ फिल्म को 15 दिन के भीतर दो करोड़ दर्शको द्वारा देखने पर केक काटा गया।
इस अवसर पर अलझ पलझ फिल्म से जुड़े कलाकारों और तकनीशियन, स्टोरीराइटर, मेकअप मैन, निर्देशक निर्माता, संवाद लेखक, गीतकार, संगीतकार, गायक सभी को सम्मानित किया गया।
इसके साथ ही देहाती फिल्मों पर लिखने वाले पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया।
 वहीं मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और गरिमामयी उपस्थिति प्रदान करने वाले लोगों को पुष्पगुच्छ, शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया साथ ही उन्हें प्रतीक चिन्ह भी दिए गए।
इस अवसर पर बोलते हुए राज्य मंत्री विजय कश्यप ने कहा कि देहाती फिल्में न केवल मनोरंजन देती है बल्कि साथ ही संदेश भी देती है इसमें आदमी स्वयं को देखता है। उन्होंने कहा कि वह प्रयास करेंगे पश्चिमी उत्तर प्रदेश देहाती फ़िल्म संघ बने, ताकि यहां की प्रतिभाओं को मुकाम और रोजगार मिल सके।
विधायक उमेश मलिक ने कहा कि वह धाकड़ छोरा उत्तर कुमार के बड़े फैन रहे हैं उनकी काफी फिल्में देखी हैं। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धाकड़ छोरा फिल्म उनके ही विधानसभा क्षेत्र के कुरालसी गांव में निर्मित हुई थी। उन्होंने कहा मुजफ्फरनगर दंगे के वास्तविक सच पर की कई बेगुनाह कैसे फंसाए गए, उनके घर परिवार की क्या स्थिति है इस भी फ़िल्म बननी चाहिए
 खतौली विधायक विक्रम सैनी ने कहा कि अपनी भाषा में फिल्म देखना बहुत अच्छा लगता है, मुजफ्फरनगर में फ़िल्म निर्माण में कोई कमी नही आने दी जाएगी। उन्होंने कहा देहाती फिल्में ग्रामीण अंचल में अधिकांश लोग देखते है।
 इस अवसर पर धाकड़ छोरा फिल्म बनाने वाले निर्देशक दिनेश कुमार को भी सम्मानित किया गया। दिनेश कुमार ने बताया कि 2004 में साढ़े 4 लाख रुपये की लागत "धाकड़ छोरा" फिल्म निर्माण में आई थी और उसने साढ़े आठ करोड़ रुपए की कमाई की थी।
 कार्यक्रम के दौरान कई गीत संगीत के कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गए। जिसमें टीवी सीरियल व देहाती फिल्म में काम करने वाली बड़ी कलाकार कविता जोशी आदि ने नृत्य कर कार्यक्रम में चार चांद लगाए। उत्तर कुमार और कविता ने "लगे 85 झटके गीत प्रस्तुत कर सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया"। देविका ठाकुर ने मंसूरपुर के सोंटा गांव में बनी 'आसरा फ़िल्म' के गीत 'प्यार धोखे आला' पर नृत्य कर वाही वाही लूटी। यह कार्यक्रम लंबे समय तक याद रहेगा।
देवराना रिसोर्ट के स्वामी हरेन्द्र सिंह ने कहा कि सब कुछ बहुत ही व्यवस्थित तरीके से हुआ और पुलिस प्रशासन की व्यवस्था उच्च कोटि की रही।


इस अवसर पर
उत्तर कुमार ने कहा कि यह फिल्में समाज का मनोरंजन करती है साथ ही हम फिल्मों के माध्यम से लोगों को संदेश देने का काम करते हैं कि अपनी संस्कृति भाषा और बड़ों की इज्जत करना कभी नहीं भूलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला हिंसा रेप बलात्कार आदि को लेकर उनकी फिल्में विकास की बहू और महासंग्राम बड़े संदेश देने में कामयाब रही है।
भावुक होते हुए उत्तर कुमार ने कहा कि अपने संघर्ष के दिनों को और संघर्ष में साथ देने वालों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
वह अपनी छोटी सी टीम से बहुत संतुष्ट हैं।
कई बार फिल्म निर्माण के दौरान कलाकारों के साथ गरमा गर्मी, नोकझोंक भी हो जाती है परंतु सब लोग कुछ समय बाद ही फिर घुलमिल जाते हैं।
उनकी पूरी टीम उनकी सहयोगी रही है जिसका नतीजा आज देहाती फिल्मों की कई दर्जन हिट फिल्म के रूप में सामने है।
उन्होंने कहा कि हमें दिल्ली पहुंचते ही अपनी ही भाषा अटपटी लगती है जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।
 यह हमारी संस्कृति है इसे हमेशा जीवित रखना है।
एक बेटा घर से बाहर कितना ही दबंग हो परंतु घर में अपनी मां से पिटता है, अपने पिता के आगे हमेशा झुकता है।
हमें यह चीजे दिखानी चाहिए और हम दिखाते है।
 ग्राम देहात में खेती-बाड़ी आदि को प्रमोट करना गांव की जिंदगी रहन-सहन को वास्तविक रूप से दिखाना ही उनका मकसद रहा है जिसमें वह सफल है।
वहीं राष्ट्रीय परिदृश्य की घटनाओं को "मैं हूँ चौकीदार" फिल्म में एक गांव के अंदर दर्शा कर यह भी देहाती फिल्मों ने साबित किया है कि उनके लेखक, संवाद लेखक, निर्देशक किसी से कम नहीं।
'विकास की बहू' जैसी फिल्में प्रदेश और केंद्र सरकार की 8 बड़ी योजनाओं को सलीके से दर्शकों के सामने रखा है तो महासंग्राम जैसी फिल्में देरी से मिलने वाले न्याय के चलते बलात्कारी को तत्काल गोली मार देने के दृश्य भी है।
"बांझ' फिल्म से महिला कि उन स्थितियों को दिखाया है कि बच्चा ना होने पर एक महिला को समाज में क्या-क्या झेलना पड़ता है।
 मुजफ्फरनगर से जुड़े फिल्म कलाकार विकास बालियान कार्यक्रम के आयोजकों में से एक रहे उन्होंने कार्यक्रम का संचालन भी किया।
यह कार्यक्रम एमडी म्यूजिक चैनल के प्रबंध निदेशक रतनपाल चौधरी द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में फ़िल्म से जुड़े लोगों के साथ 150 से अधिक विभिन्न हस्तियों को अवार्ड देकर सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े 11 गरीब बच्चों को बुलाकर उनके साथ भोज किया गया। उन्हें पीजा आदि खिलवाया गया और साथ ही उन सभी को गर्म जर्सी आदि अतिथि गणों द्वारा दिलाकर सम्मानित कराया गया।
साथ ही चहेते कलाकारों संग उनकी सेल्फी भी कराई गई।


इस अवसर पर 'अलझ पलझ' फिल्म और देहाती फिल्मों से जुड़े अभिनेता उत्तर कुमार, अभिनेत्री कविता जोशी, विकास बालियान, फिल्म निर्देशक दिनेश कुमार, फ़िल्म निर्माता ओ पी राय, प्रताप धामा, लेखक कृष्णपाल भारत, राजवीर सिंह डांगी और मनु वर्मा, कलाकार उषा देवी, संतोष जांगरा, विकास बालियान, राजीव सिरोही, प्रिया संधू, सपना चौधरी, सुरजीत सिरोही, अमित सहोटा, राजेंद्र कश्यप, रतनपाल चौधरी, अरविंद मलिक, मोनू धनकड़, मोनू सहरावत, प्रिंसी, दिव्यानी शर्मा, अंशिका, बिजेंद्र सिंह के साथ एडिटर हरीश चंद्रा, कैमरामैन अंकित चौधरी, कन्हैया बघेल और गिरीश गौतम, मेकअप मैन मुस्तकीम लकी अली, गायक प्रदीप पांचाल, गायिका सोनम ठाकुर, प्रदीप सोनू, प्रोडक्शन कंट्रोलर मोनू धनकड़, प्रोडक्शन प्रबन्धक विकास कुमार 'चाचा', डीओपी दीपक भारद्वाज,  स्पॉट बॉय अभिषेक, विकास, गौरव, प्रमोद आदि को एवार्ड देकर सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन देहाती फ़िल्म कलाकार विकास बालियान ने किया। राजेन्द्र कश्यप को अलझ पलझ फ़िल्म का विशेष रूप से नोरंग किरदार को ऊंचाई देने पर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बाहर से पधारे देहाती फिल्म कलाकारों ने कहा कि मुजफ्फरनगर की धरती में गुड़ की मिठास है तो यहां के लोगों में अपनापन है। किसी ने गलत ही कहा कि यह दंगों का शहर है या यह क्राइम कैपिटल है। फिल्म कलाकारों का कहना था कि यह तो मोहब्बत का पैगाम बांटने वालों का शहर है, जहां गुड और शक्कर की मिठास चारों ओर दिखाई देती है।